आशिका मंत्र
मंगलं भगवान् वीरो, मंगलं गौतमो गणी।
मंगलं कुन्दकुन्दार्यो, जैनधर्मोऽस्तु मंगलम्॥
सर्वमंगल-मांगल्यं, सर्वकल्याण-कारणम्।
प्रधानं सर्वधर्माणां, जैनं जयतु शासनम्॥
(स्थापनाजी से आशिका लेते समय बोलें)
श्री जिनवर की आशिका, लीजै शीश नमाय।
भव-भव के पातक हरै, दुःख दूर हो जाय॥